इतिहास

07-Jul-2017

स्वाधीनता प्राप्ति के उपरांत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परमपूज्यनीय माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर गुरूजी ने भारतीय वातावरण के अनुकूल संस्कारक्षम शिक्षण पद्धति विकसित करने का विचार किया। इस हेतु 1952 ई में गोरखपुर में प्रथम सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना हुई। मध्यप्रदेश में रीवा नगर में सन 1959 ई में प्रदेश का पहला सरस्वती शिशु मंदिर प्रारंभ किया गया ।प्रबंधन एवं मार्गदर्शन की दृष्टि से 1977 ई में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान नई दिल्ली की स्थापना की गई एवं महाकौशल प्रांत में सरस्वती शिक्षा परिषद महाकौशल प्रांत जबलपुर की स्थापना की गई।

डॉ हरिसिंह गौर जैसे महानशिक्षाविद की जन्मभूमि एवं लाखा बंजारा की त्यागभूमि सागर नगर के सिविल लाईंस , रमझिरिया क्षेत्र में भी एक विद्यालय प्रारंभ करने की योजना बनाई गई। प्रो प्रभाकर राव पाटणकर , श्री अरूण जी पलनिटकर , प्रो . अविनाश जी अडोणी एवं श्री नचिकेता भावे ने विचार विमर्ष कर जुलाई 1993 ई में सिविल लाइंस क्षेत्र में रमझिरिया सरस्वती शिशु मंदिर सिविल लाइन सागर की नींव डाली । विद्यालय के प्रबंधन एवं संचालन हेतु राष्ट्रऋषि गुरू गोलवलकर गुरूजी के नाम पर माधव शिक्षा समिति की स्थापना 29 अक्टूबर सन 1993 ई. में की गई।

प्रारम्भ में विद्यालय में 03 कक्षाएं एलकेजी , यू के जी एवं प्रथम प्रारंभ की गई। जो प्रतिवर्ष कर्मश: एक कक्षा वृद्धि होते हुए आज हाईस्कूल की कक्षा 10 वीं तक संचालित है। इस संस्था के प्रथम नियमित प्रधानाचार्य श्री नरेन्द्र जी ठाकरे बने एवं प्रथम नियमित आचार्य वर्तमान प्राचार्य श्री सुरेन्द्र जी जैन बने । अपने उत्कृष्ट षिक्षण के कारण यह विद्याभारती द्वारा घोषित ‘आदर्ष विद्यालय’ है । विद्यालय प्रबंध समिति ने 1996 ई में विश्वविद्यालय की तलहटी में स्थित शासकीय पालीटेक्निक कालेज के सामने रमझिरिया क्षेत्र में भूमिक्रय कर विशाल विद्यालय भवन का निर्माण कराया । 1993 ई. से ही शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान रचता हुआ रमझिरिया प्रकल्प एक शैक्षिक शोध संस्थान जैसा विकसित हुआ है ।

वर्ष 1999 ई की प्राथमिक प्रमाण पत्र परीक्षा की जिला प्रावीण्य सूची में कक्षा 5 वी में अध्ययनरत 36 भैया - बहिनों में से 17 भैया बहिन ने प्रावीण्य सूची में स्थान अर्जित कर शिक्षा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। तब से प्रतिवर्ष कक्षा 5 वी एवं 8वीं की प्रावीण्य सूची में इस संस्था के भैया बहिनों ने लगातार अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई।हाईस्कूल परीक्षा परिणाम 2012 (विद्यालय में कक्षा 10 वीं का प्रथम बैच ) का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा , कक्षा में अध्ययनरत 53 विद्यार्थियों में से 49 प्रथम श्रेणी में,एवं शेष 04 द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए , इनमें से 29 भैया बहिनों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित किए ।

शारीरिक , खेलकूद , बौद्धिक ,विज्ञान मेला ,विज्ञान माडल्स ,आचार्य शोध पत्र जैसी विधाओं में इस विद्यालय के भैया बहिनों एवं आचार्यों का सतत गौरवशाली परिणाम रहा है। प्रतिवर्ष अखिल भारतीय स्तर की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विद्यालय के भैया बहिनों का सराहनीय प्रदर्शन रहता है।

शिक्षण हेतु विद्यालय में निरंतर शिक्षण शोध कार्यशालाएं संचालित रहती है। विद्यालय के सभी षिक्षक कम्प्यूटर शिक्षण गतिविधि आधारित शिक्षण ,एवं क्रिया आधारित शिक्षण में प्रषिक्षित है।

संस्था में क्रीड़ा उद्यान , साइंस पार्क , 60 कम्प्यूटरों से युक्त कम्प्यूटर प्रयोगषाला , मल्टीमीडिया एजुकेषन सिस्टम ,गणित ,भौतिकी , रसायनषास्त्र , जीवविज्ञान की विषयवार पृथक - पृथक प्रयोगशालाएं हैं । शिशु कक्षाओं के उत्तम शिक्षण हेतु उनके कक्षा कक्ष में ही शिशु वाटिका एवं प्रयोगषाला स्थापित की गई है।